उत्तराखंड की लोक संस्कृति में डुबी नई पहचान: धामी सरकार का योगदान

Nov 2, 2025 - 16:30
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उत्तराखंड की लोक संस्कृति में डुबी नई पहचान: धामी सरकार का योगदान
उत्तराखंड की लोक संस्कृति में डुबी नई पहचान: धामी सरकार का योगदान

उत्तराखंड की लोक संस्कृति में डुबी नई पहचान: धामी सरकार का योगदान

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कम शब्दों में कहें तो उत्तराखंड में आज पारंपरिक पर्वों को नया गौरव मिला है। सोशल मीडिया पर #IgaasLokparvWithDhami लगातार ट्रेंड कर रहा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि धामी सरकार की पहल ने स्थानीय संस्कृति को नयी ऊंचाईयों पर पहुंचाया है।

धामी सरकार की पहल

देहरादून में आयोजित #IgaasLokparvWithDhami पर्व ने उत्तराखंड के सांस्कृतिक धरोहर को एक नए संदर्भ में प्रस्तुत किया। धामी सरकार ने इस कार्यक्रम के माध्यम से ना केवल पारंपरिक पर्वों को जीवीत किया, बल्कि उनकी आवश्यकता और महत्व को भी रेखांकित किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमारे पर्व और उत्सव हमारी पहचान हैं और उनकी महत्ता को समझने की आवश्यकता है।

सोशल मीडिया का प्रभाव

समाज में लोक संस्कृति के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए सोशल मीडिया ने कदम उठाया है। दिन भर #IgaasLokparvWithDhami ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर ट्रेंड करता रहा, जिससे प्रदेश के लोगों ने अपनी संस्कृति के प्रति गर्व महसूस किया। इस अभियान ने लोगों को अपने क्षेत्रों की सांस्कृतिक धरोहर को साझा करने के लिए प्रेरित किया।

आकर्षक कार्यक्रम और प्रदर्शन

प्रतिभाशाली कलाकारों ने विभिन्न लोक नृत्य और संगीत प्रस्तुत किए, जो न केवल दर्शकों को मंत्रमुग्ध करते थे बल्कि सांस्कृतिक विविधता को भी प्रदर्शित करते थे। इस कार्यक्रम में स्थानीय खाने, कला और हस्तशिल्प के स्टॉल भी लगाए गए थे, जिन्होंने स्थानीय व्यापार को बढ़ावा दिया।

स्थानीय संस्कृति की आवश्यकता

सांस्कृतिक पर्वों का आयोजन प्रदेशवासियों को एकजुट करने का काम करता है। यह हमें हमारी जड़ों से जोड़ता है और हमें हमारी पारंपरिक विरासत का अहसास कराता है। जैसे-जैसे समय बदलता है, हमें अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए ऐसे कार्यक्रमों की आवश्यकता महसूस होती है।

निष्कर्ष

उत्तराखंड की लोक संस्कृति में रंगी इस विशेष पहचान ने प्रदेश की संस्कृति को नहरी दिशा दी है। धामी सरकार के प्रयासों से यह स्पष्ट हो गया है कि स्थानीय पर्वों को सम्मान देना और उन्हें जीवित रखना आवश्यक है। यह केवल पर्व नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति का प्रतीक है।

इसके साथ ही, हम सभी से यह अनुरोध करते हैं कि वे अपनी पारंपरिक संस्कृति का समर्थन करें और इसे आगे बढ़ाने में सहयोग करें। अधिक अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएं।

सादर,

टीम डिस्कवरी ऑफ इंडिया, सुमन कुमारी

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