उत्तराखंड: दिवंगत पत्नी की याद में बुजुर्ग ने बनवाया मंदिर, रोज करते हैं पूजा

Apr 27, 2026 - 16:30
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उत्तराखंड: दिवंगत पत्नी की याद में बुजुर्ग ने बनवाया मंदिर, रोज करते हैं पूजा
उत्तराखंड: दिवंगत पत्नी की याद में बुजुर्ग ने बनवाया मंदिर, रोज करते हैं पूजा

उत्तराखंड: दिवंगत पत्नी की याद में बुजुर्ग ने बनवाया मंदिर, रोज करते हैं पूजा

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में एक बुजुर्ग ने अपनी पत्नी की याद में मंदिर बनाया है, जहाँ वे प्रतिदिन पूजा करते हैं। यह कहानी न केवल प्रेम का प्रतीक है बल्कि जीवन के प्रति एक समर्पण का भी उदाहरण है।

बागेश्वर के कपकोट क्षेत्र के फरसाली वल्ली तिलघर गांव में रहने वाले 89 वर्षीय पूर्व सैनिक केदार सिंह कोश्यारी ने अपनी दिवंगत पत्नी लक्ष्मी देवी की याद में यह मंदिर बनवाया है। केदार सिंह की उम्र के बावजूद, उनका यह कार्य न केवल उनकी पत्नी के प्रति शाश्वत प्रेम को दर्शाता है बल्कि यह भी बताता है कि यादें कभी खत्म नहीं होतीं।

प्यार की एक अनोखी कहानी

केदार सिंह कोश्यारी ने अपनी पत्नी को खोने के बाद खुद को अकेला महसूस किया। उनकी यादों को जिंदा रखने के लिए उन्होंने अपने घर में लक्ष्मी देवी का एक मंदिर बनवाने का फैसला किया। यह मंदिर अब उनके लिए सिर्फ एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि लक्ष्मी देवी के साथ बिताए गए समय की याद दिलाने वाला एक महत्वपूर्ण स्थान बन गया है।

हर दिन सूर्योदय के साथ, केदार सिंह सुबह की पूजा करते हैं, जिसमें वह लक्ष्मी देवी की मूर्ति को स्नान कराते हैं और उन्हें फूल Offer करते हैं। शाम को भी उनकी पूजा का यही क्रम जारी रहता है। इस धार्मिक अनुष्ठान के जरिए, वह ना केवल अपनी पत्नी के प्रति प्यार को व्यक्त करते हैं बल्कि मानसिक और आत्मिक शांति भी पाते हैं।

सामाजिक दृष्टिकोण

इस घटना ने न केवल बागेश्वर बल्कि पूरे उत्तराखंड में लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। समाज में ऐसे संबंधों और प्रेम की कहानियों की हर कोई सराहना कर रहा है। यह उदाहरण सभी के लिए एक संदेश है कि प्रेम केवल एक भावना नहीं है, बल्कि एक अद्वितीय बंधन का नाम है जो जीवन भर बना रहता है।

बुजुर्गों के प्रति समाज की सोच और विवाह के बंधन के संबंध में समझदारी में यह कहानी एक सकारात्मक पहलू है। अंदर से जुड़े रिश्ते समाज को जोड़ने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

संदेश और प्रेरणा

इस कहानी को पढ़कर हम सभी को यह संदेश मिलता है कि प्रेम और श्रद्धा का कोई अंत नहीं होता। जीवन के विभिन्न पहलुओं में कोई न कोई रूप हम सभी को अपने प्रिय जनों को याद करने का अवसर देते हैं। केदार सिंह की यह कहानी हमें यह सिखाती है कि भले ही कोई हमारे साथ न हो, उनकी यादें और उनकी बातें हमेशा हमारे दिल में बसी रहती हैं।

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सादर,

Team Discovery Of India - निधि वर्मा

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