महंगी किताबों का खेल बेनकाब, 7 निजी स्कूलों को तीन दिन में स्पष्टीकरण देने का आदेश
महंगी किताबों का खेल बेनकाब, 7 निजी स्कूलों को तीन दिन में स्पष्टीकरण देने का आदेश
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कम शब्दों में कहें तो, बागेश्वर जिले के बड़े निजी स्कूलों में पाठ्यपुस्तकों को लेकर गंभीर अनियमितताएँ सामने आई हैं। प्रशासनिक टीम की जांच में कई स्कूलों द्वारा एनसीईआरटी की सस्ती और मानक किताबों को नजरअंदाज करते हुए निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों को छात्रों पर थोपने की बात उजागर हुई है।
जांच की विस्तृत जानकारी
बागेश्वर जिले में हुए इस मामले की जांच बीईओ गरुड़ कमलेश्वरी मेहता, जिला सेवायोजन अधिकारी प्रवीण चंद्र गोस्वामी और रीप के परियोजना प्रबंधक आरिफ मोहम्मद खान की संयुक्त टीम द्वारा की गई। इस जांच में पाया गया कि कई स्कूलों में छात्रों से अवैध रूप से अधिक पैसे वसूले जा रहे थे, जिससे अभिभावकों में चिंता और असंतोष का माहौल बन गया है।
अभिभावकों की प्रतिक्रिया
अभिभावकों ने इस मुद्दे को लेकर कड़ी निंदा की है और शिक्षा विभाग से जल्द से जल्द उचित कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक किताबों की खरीदारी में मानक और सस्ती किताबों के विकल्प मौजूद हैं, लेकिन निजी स्कूल जानबूझकर महंगी किताबों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
स्कूलों पर कार्रवाई की तैयारी
प्रशासन ने इन सात निजी स्कूलों को तीन दिन के अंदर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है। यदि स्कूलों ने खरीदी गई किताबों को लेकर स्पष्ट उत्तर नहीं दिया, तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा सकती है। यह मामला न केवल शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है, बल्कि इसमें भ्रष्टाचार की बू भी है, जिसे प्रशासन का ध्यान तुरंत आकर्षित कर रहा है।
शिक्षा में सुधार की आवश्यकता
इस प्रकरण के बाद शिक्षा को लेकर एक बार फिर से गंभीर चर्चा शुरू हो गई है। क्या निजी स्कूलों को सस्ती और मानक किताबें छात्रों को उपलब्ध कराना चाहिए? क्या सस्ती किताबों का चयन अनिवार्य करना चाहिए? इस दिशा में क्या कदम उठाए जाएंगे, यह देखना अभी बाकी है।
शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह की घटनाएँ गंभीर चिंता का विषय हैं और इससे शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट आ सकती है। अभिभावकों और छात्रों की उम्मीदें हैं कि जल्दी से जल्दी इस मुद्दे पर ठोस कदम उठाए जाएं।
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सादर,
टीम डिस्कवरी ऑफ इंडिया,
सुरभि कुमारी
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