संत समाज ने मुख्यमंत्री धामी को दिया आशीर्वाद — ‘देवभूमि के धर्म-संरक्षक’ की उपाधि

Nov 6, 2025 - 16:30
 120  501.9k
संत समाज ने मुख्यमंत्री धामी को दिया आशीर्वाद — ‘देवभूमि के धर्म-संरक्षक’ की उपाधि
संत समाज ने मुख्यमंत्री धामी को दिया आशीर्वाद — ‘देवभूमि के धर्म-संरक्षक’ की उपाधि

संत समाज ने मुख्यमंत्री धामी को दिया आशीर्वाद — ‘देवभूमि के धर्म-संरक्षक’ की उपाधि

Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Discovery Of The India

कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड की रजत जयंती वर्ष के अवसर पर मुख्यमंत्री आवास को आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक सौहार्द का केंद्र बनाते हुए, देशभर के प्रमुख संतों और धर्माचार्यों ने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से भेंट की और राज्य की प्रगति के संदर्भ में उनके अभूतपूर्व प्रयासों की सराहना की।

देहरादून में आयोजित इस विशेष अवसर पर, संत समाज ने मुख्यमंत्री को आशीर्वाद प्रदान करते हुए उन्हें “देवभूमि का धर्म-संरक्षक” की उपाधि दी। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री धामी के दिशा-निर्देशन में उत्तराखंड आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और विकास की नई ऊचाइयों की ओर बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री आवास में आध्यात्मिक संगम

इस संगम में शामिल हुए संतों में आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी जी महाराज, जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी, परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती जी, अखाड़ा परिषद अध्यक्ष स्वामी रविंद्रपुरी महाराज, बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, पतंजलि योगपीठ के आचार्य बालकृष्ण, प्रसिद्ध आध्यात्मिक वक्ता जया किशोरी और चिंतक डॉ. कुमार विश्वास शामिल थे। सभी संतों ने मुख्यमंत्री को रजत जयंती वर्ष की शुभकामनाएं दीं और उनके प्रयासों की सराहना की।

सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण

संतों का कहना है कि “मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक परंपरा को मजबूत बनाने में उत्कृष्ट नेतृत्व प्रदान किया है। उनके द्वारा उठाए गए कदमों से देवभूमि की मूल आत्मा और सनातन विरासत सुरक्षित और सुदृढ़ हुई है।” उन्होंने यह भी कहा कि शासन की नीतियों ने धार्मिक स्थलों का संरक्षण, आध्यात्मिक पर्यटन विकास और परंपरा-संरक्षण को नया आयाम दिया है।

कुम्भ-2027 की भव्य तैयारी

संत समाज ने मुख्यमंत्री धामी को आश्वस्त किया कि वे हरिद्वार कुम्भ-2027 को भव्य, दिव्य और विश्व-स्तरीय आयोजन बनाने के लिए सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करेंगे। संतों का कहना है कि कुम्भ एक धार्मिक पर्व होने के साथ-साथ सनातन परंपरा, भारतीय संस्कृति और वैश्विक आध्यात्मिक चेतना का महासंगम है। इसे ऐतिहासिक स्वरूप देना सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने सरकार द्वारा की जा रही सभी प्रयासों की सराहना की, जिनमें यातायात, अधोसंरचना, घाटों का सौंदर्यीकरण, सुरक्षा व्यवस्थाएं और स्वच्छता के क्षेत्र शामिल हैं। ये योजनाएं हरिद्वार को विश्व आध्यात्मिक धरोहर के केंद्र के रूप में और अधिक प्रतिष्ठित बनाएंगी।

धामी के नेतृत्व की प्रशंसा

संतों ने कहा कि “मुख्यमंत्री धामी ने उत्तराखंड को कुम्भ-2027 में एक नए आयाम तक पहुँचाने की जो दूरदृष्टि प्रस्तुत की है, वह प्रेरणादायक है। सरकार के त्वरित निर्णय, पारदर्शिता और धार्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान से हमें पूरा विश्वास है कि यह कुम्भ हमारे इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय लिखेगा।”

संत समाज ने यह भी कहा, "हम संत-महात्मा, अखाड़े और धर्म संस्थान एक परिवार की तरह एकजुट होकर कुम्भ की सफलता के लिए निरंतर योगदान देंगे।" यह देखा गया कि उत्तराखंड अब तेजी से एक वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र और शांति-स्थल के रूप में उभर रहा है, जिसकी श्रेय स्थानीय सरकार की सांस्कृतिक दृष्टि और दूरदर्शी रणनीति को है।

कार्यक्रम में उपस्थित सभी संतों और आध्यात्मिक गुरुओं ने प्रदेश वासियों के लिए मंगलकामनाएं व्यक्त कीं और उत्तराखंड की रजत जयंती को आध्यात्मिक रूप से ऐतिहासिक बनाने के लिए मुख्यमंत्री को आशीर्वाद दिया।

अधिक अपडेट्स के लिए, कृपया यहां क्लिक करें.

सुमन मेहता, टीम डिस्कवरी ऑफ इंडिया

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0