सिर्फ अच्छे अंक नहीं, अच्छे संस्कार भी जरूरी: बंशीधर तिवारी का महत्वाकांक्षी संदेश
सिर्फ अच्छे अंक नहीं, अच्छे संस्कार भी जरूरी: बंशीधर तिवारी का महत्वाकांक्षी संदेश
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कम शब्दों में कहें तो, बंशीधर तिवारी ने छात्रों को संदेश दिया है कि केवल अच्छे अंक प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं है। इसके साथ ही, उन्हें ज्ञान, अच्छे चरित्र और नैतिक मूल्यों पर भी ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।
डीडी न्यूज़ में बंशीधर तिवारी का बोल्ड बयान
जून 2026 में देहरादून के एक शैक्षणिक कार्यक्रम में, महानिदेशक सूचना एवं मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) के उपाध्यक्ष, बंशीधर तिवारी ने विद्यार्थियों की सोच में एक बड़ा परिवर्तन लाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा, "आधुनिक शिक्षा केवल अच्छी डिग्री या अंक प्राप्त करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए।" यह विचार सभी विचारशील छात्रों के लिए एक नई दिशा प्रशस्त करता है।
ज्ञान और संस्कार: सफलता की कुंजी
तिवारी ने यह भी उल्लेख किया कि ज्ञान के साथ-साथ चरित्र और नैतिक मूल्यों का विकास अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा, "किसी भी व्यक्ति की सफलता का माप केवल अंक नहीं होते। उसके जीवन में उसके द्वारा प्रदर्शित किए गए नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों का भी योगदान होता है।" ऐसे गुण युवाओं को न केवल व्यक्तिगत रूप से उत्कृष्ट बनाएंगे, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में भी सहायक होंगे।
संस्कारों की आवश्यकता: एक नया दृष्टिकोण
बंशीधर तिवारी ने इस बात की ओर भी इशारा किया कि विद्यार्थियों को चाहिए कि वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पहचानें और उन्हें निभाएं। उन्होंने कहा, "हमारे संस्कार ही हमारी पहचान होते हैं। यदि हम अच्छे नागरिक नहीं बनेंगे, तो हमारे अच्छे अंक भी बेकार साबित होंगे।" यह वक्तव्य आज के संदर्भ में समाज में एक नई जागरूकता की आवश्यकता को दर्शाता है।
बुनियाद: शिक्षा का सर्वांगीण विकास
सिर्फ अच्छे अंक प्राप्त करने की लालसा के बजाय, तिवारी ने एक समग्र शिक्षा प्रणाली की मांग की, जो न केवल विद्या भी दे, बल्कि छात्रों को एक बेहतर इंसान बनाने की दिशा में भी कार्य करे। उन्होंने कहा, "हमें चाहिए कि हम छात्रों को न केवल अकादमिक शिक्षा दें, बल्कि उन्हें ऐसे शिक्षण का अनुभव भी कराएं, जो सामाजिक उत्तरदायित्व को विकसित कर सके।"
समापन: शिक्षा का नया आयाम
इस प्रकार, बंशीधर तिवारी के इस वक्तव्य ने हमें यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि हमें केवल अच्छे अंक प्राप्त करने की जल्दी में नहीं रहना चाहिए, बल्कि हमें अपने चरित्र की भी परवाह करनी चाहिए। यह परिवर्तन विद्यार्थियों को केवल नौकरी पाने में नहीं, बल्कि एक अच्छी मानवता बनने में मदद करेगा।
अब आवश्यकता है कि सभी विद्यार्थी इस संदेश को समझें और अपने जीवन में इन विचारों को अपनाएं। शिक्षा केवल एक प्रतिस्पर्धा नहीं है, बल्कि यह हमारे मूल्य और संस्कारों के निर्माण का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
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Team Discovery Of India, नंदिनी शर्मा
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