हरिद्वार में मसान होली: किन्नर समाज ने रंगों और श्रद्धा के साथ मनाया पर्व
हरिद्वार में मसान होली: किन्नर समाज ने रंगों और श्रद्धा के साथ मनाया पर्व
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कम शब्दों में कहें तो: उत्तराखंड के हरिद्वार में किन्नर समाज ने आज मसान होली का आयोजन किया, जहाँ उन्होंने श्रद्धा पूर्वक चिता की राख की पूजा की और एक-दूसरे को होली की शुभकामनाएं दी।
अशोक गिरी हरिद्वार
उत्तराखंड के जिला हरिद्वार में आज, 28 फरवरी 2026, शनिवार को किन्नर समाज ने खड़खड़ी श्मशान घाट पर मसान होली का आयोजन किया। इस खास अवसर पर महामंडलेश्वर भवानी शंकरानंद गिरी के नेतृत्व में किन्नर समुदाय बैंड-बाजों के साथ जूलूस के रूप में श्मशान घाट पहुंचे। वहां उन्होंने सबसे पहले चिता की राख की विधिवत पूजा-अर्चना की।
इसके बाद, किन्नरों ने एक-दूसरे को चिता की राख और रंग गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। इस दृश्य को देखकर शमशान घाट पर उपस्थित लोग थोड़ी देर के लिए अचंभित रह गए। यह निश्चित रूप से एक अद्भुत और अनूठा अनुभव था, जहां जीवन और मृत्यु की परंपरा एक साथ मनाई जा रही थी।
परंपरा का इतिहास
महामंडलेश्वर भवानी शंकरानंद गिरी ने इस मौके पर सभी को होली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सतयुग में श्मसान में होली मनाने की परंपरा थी। उन्होंने बताया कि भगवान शिव ने रंगभरी एकादशी पर देवी गौरा का गौना कराकर उनके साथ काशी पहुंचे, लेकिन वहां भूत-प्रेत, यक्ष, गंधर्व आदि के साथ वह होली नहीं खेल पाए। इसलिए, उन्होंने अगले दिन मसान में होली खेली थी।
इस घटना के बाद से मसान की होली की परंपरा शुरू हुई। अब, किन्नर समाज इस परंपरा को हरिद्वार में पुनर्जीवित कर रहा है। पिछले तीन वर्षों से, किन्नर समाज हरिद्वार में मसान होली का आयोजन कर रहा है और सभी को प्राकृतिक रंगों से होली मनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।
मोक्ष का संदेश
महामंडलेश्वर पूनम किन्नर ने इस आयोजन को मोक्ष का द्वार बताते हुए कहा कि हर व्यक्ति को एक दिन श्मशान में आना है। उन्होंने इस पौराणिक परंपरा को जीवित करने के लिए हर किसी से जुड़ने का आह्वान किया। इस अवसर पर महामंडलेश्वर प्रेम पुरी ने भी कहा कि किन्नर समाज ने राष्ट्रहित की कामना के साथ मसान होली मनाई है।
उन्होंने कहा कि श्मशान की राख जीवन की नश्वरता का संदेश देती है और अहंकार त्याग करके प्रेम एवं भाईचारे के साथ जीने की प्रेरणा देती है। इस उपलक्ष्य पर बड़ी संख्या में किन्नर समुदाय शामिल हुआ।
यह आयोजन वास्तव में एक अनोखा अनुभव था, जो कि न सिर्फ किन्नर समाज के लिए, बल्कि सभी वहां उपस्थित व्यक्तियों के लिए एक गहरा संदेश लेकर आया। प्यार और बंधुत्व का यह रंग पर्व सभी के दिलों में एक सकारात्मक परिवर्तन लाने में सक्षम है।
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टीम डिस्कवरी ऑफ इंडिया
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