उम्र नहीं होती बाधा: 60 वर्षीय भुवन चंद्र पनेरू ने बनाया युवाओं के लिए पैराग्लाइडिंग में मिसाल

Feb 8, 2026 - 08:30
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उम्र नहीं होती बाधा: 60 वर्षीय भुवन चंद्र पनेरू ने बनाया युवाओं के लिए पैराग्लाइडिंग में मिसाल

उम्र नहीं होती बाधा: 60 वर्षीय भुवन चंद्र पनेरू ने बनाया युवाओं के लिए पैराग्लाइडिंग में मिसाल

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कम शब्दों में कहें तो, 60 वर्षीय भुवन चंद्र पनेरू की कहानी इस बात का प्रमाण है कि उम्र केवल एक संख्या है। कपकोट (बागेश्वर) में चल रही राष्ट्रीय पैराग्लाइडिंग एक्यूरेसी प्रतियोगिता में भाग लेकर उन्होंने साबित कर दिया है कि साहस और जुनून किसी भी उम्र में बढ़ सकता है।

कपकोट में रोमांचक प्रतियोगिता

बागेश्वर जनपद के कपकोट स्थित ऐतिहासिक केदारेश्वर मैदान में आयोजित राष्ट्रीय पैराग्लाइडिंग एक्यूरेसी प्रतियोगिता इस समय पूरे देश का ध्यान खींच रही है। यह प्रतियोगिता न केवल रोमांच और उत्साह का केंद्र बनी हुई है, बल्कि यहां पर अनुभवी पैराग्लाइडर पायलटों और भारतीय सेना के प्रशिक्षित पायलटों का सम्मिलन भी हो रहा है।

भुवन चंद्र पनेरू: एक प्रेरक व्यक्तित्व

पिथौड़ागढ़ के 60 वर्षीय भुवन चंद्र पनेरू इस प्रतियोगिता के सबसे बड़े आकर्षण में से एक हैं। उनकी आयु या अनुभव एक बाधा नहीं बनी, बल्कि एक प्रेरणा स्रोत बन गई है। भुवन ने अपने साहसिक जज़्बे और अदम्य लगन से युवा पायलटों को प्रेरित किया है। उनके कहने का तरीका और अनुभव वह सब कुछ है जो एक युवा पायलट को चाहिए होता है।

प्रतियोगिता की विशेषताएँ

इस प्रतियोगिता में देशभर के विभिन्न हिस्सों से पायलट भाग ले रहे हैं, जो प्रतिभा और कौशल का अद्वितीय प्रदर्शन कर रहे हैं। यहां पर हिस्सा लेने वाले पायलटों में सिर्फ अनुभवी पायलट ही नहीं, बल्कि कई युवा और नए पायलट भी शामिल हैं। क्लाइमेट और टेक्निकल चेलेंजेस ने इस गतिविधि को और भी रोमांचक बना दिया है।

पैराग्लाइडिंग का महत्व

पैराग्लाइडिंग न केवल एक एड्रेनालिन रश है, बल्कि यह मानव आत्मा के लिए एक अद्वितीय अनुभव भी है। यह साहस को प्रोत्साहन देता है, खौफ को चुनौती देता है और हमें अपने सीमाओं को लाँघने के लिए प्रेरित करता है। भुवन चंद्र पनेरू जैसे अनुभव पंचानवे यह दिखाते हैं कि उम्र भले ही दिक्क़त दे, लेकिन साहस और जुनून किसी भी बाधा को पार कर सकते हैं।

समापन विचार

इस प्रतियोगिता में भाग लेकर भुवन चंद्र पनेरू ने न केवल अपनी प्रतिभा को साबित किया है, बल्कि वे युवाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत भी बन गए हैं। उनकी कहानी हमें यह सिखाती है कि अगर मन में लगन हो, तो कड़ी मेहनत से कुछ भी हासिल किया जा सकता है।

वास्तव में, यह प्रतियोगिता न केवल पैराग्लाइडिंग की कला को दर्शाती है, बल्कि यह साहस, संघर्ष और विलक्षणता की कहानी भी बयां करती है।

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टीम डिस्कवरी ऑफ इंडिया
अंजलि शर्मा

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