गोलना का प्राथमिक विद्यालय: ग्रामीणों के प्रयास से फिर बजी बच्चों की किलकारी
गोलना का प्राथमिक विद्यालय: ग्रामीणों के प्रयास से फिर बजी बच्चों की किलकारी
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कम शब्दों में कहें तो, बागेश्वर के कपकोट तहसील में स्थित गोलना गांव का प्राथमिक विद्यालय, जो कि छात्र संख्या के अभाव में बंद होने के कगार पर था, अब पुनः बच्चों की खुशी से भर उठा है। ग्रामीणों और अभिभावकों की एकता और सामूहिक प्रयास के चलते इस विद्यालय को एक नया जीवन मिला है।
गोलना गांव का विद्यालय: हालात की परछाई
कपकोट (बागेश्वर)। गोलना गांव का राज्य प्राथमिक विद्यालय पिछले चार वर्षों से सिर्फ एक छात्रा के सहारे संचालित हो रहा था। पहले यह विद्यालय बच्चों की भरी किलकारियों से गूंजता था लेकिन छात्र संख्या में गिरावट के कारण यह बंद होने की कगार पर पहुँच गया था। विद्यालय की स्थिति चिंताजनक थी, जिससे स्थानीय निवासियों में चिंता का माहौल था।
ग्रामीणों का सामूहिक प्रयास
हाल ही में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और अभिभावकों ने मिलकर इस समस्या का समाधान निकालने का प्रयास किया। उन्होंने एकमत होकर विद्यालय को पुनर्जीवित करने के लिए कार्य शुरू किया। यह विचार किया गया कि यदि इस विद्यालय को बचाना है तो इसके लिए समुदाय का सहयोग अनिवार्य है।
नया जीवन, नई उम्मीदें
ग्रामीणों की मेहनत रंग लाई और अब विद्यालय फिर से बच्चों के उल्लास से गूंज रहा है। नए सिरे से नामांकन हुआ और कई बच्चों ने विद्यालय में प्रवेश लिया। ऐसा लगता है कि जैसे विद्यालय में फिर से एक नई ऊर्जा का संचार हुआ हो। अब इस प्राथमिक विद्यालय में छात्र-छात्राएं न केवल शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, बल्कि वे खेल-कूद में भी हिस्सा ले रहे हैं।
अभिभावकों का औसत प्रतिशत
गाँव के अभिभावकों ने यह समझा कि शिक्षा केवल बच्चों का अधिकार नहीं, बल्कि गांव के विकास का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कई अभिभावक इस विद्यालय को अपने बच्चों के भविष्य के लिए एक सुरक्षित प्लेटफार्म मानते हैं। शिक्षकों ने भी अपने अनुभव से यह साबित कर दिया है कि बच्चों को उचित शिक्षा देने के लिए विद्यालय का अस्तित्व बहुत आवश्यक है।
निष्कर्ष: सामूहिक प्रयास की शक्ती
गोलना के प्राथमिक विद्यालय की इस अद्भुत पुनः स्थापना ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब समुदाय एकजुट होता है, तो वह किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम होता है। यह घटना न केवल बच्चों के लिए बल्कि पूरे गांव के लिए एक नई शुरुआत की ओर संकेत करती है। ग्रामीणों और विद्यालय के सभी हिस्सेदारों ने मिलकर यह साबित कर दिया है कि शिक्षा की मास्टरक्लास का कोई विकल्प नहीं है।
इस समाचार से प्रेरित होकर हम सभी को अपने समाज में ऐसे प्रयासों को आगे बढ़ाने की प्रेरणा लेनी चाहिए। शिक्षा, विकास और समाज की भलाई के लिए यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
अधिक जानकारी के लिए, कृपया यहां क्लिक करें.
सादर,
टीम डिस्कवरी ऑफ इंडिया
सीमा रानी
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