दुर्गम विद्यालय के अद्भुत शिक्षण से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच तक छात्र प्रतिभाओं को पहुंचाया - डॉ. हरीश दफौटी का सम्मान
दुर्गम विद्यालय के अद्भुत शिक्षण से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच तक छात्र प्रतिभाओं को पहुंचाया
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कम शब्दों में कहें तो, जनपद बागेश्वर के दुर्गम क्षेत्र स्थित सैलानी विद्यालय के शिक्षक डॉ. हरीश दफौटी को उनके अद्वितीय कार्य के लिए सम्मानित किया गया है।
बागेश्वर, उत्तराखंड: दुर्गम क्षेत्र स्थित सैलानी विद्यालय के छात्रों की प्रतिभा को न केवल कला के माध्यम से निखारने का कार्य किया गया है, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का साहसिक कदम भी उठाया गया है। इस अनूठे प्रयास का नेतृत्व करते हुए शिक्षक डॉ. हरीश दफौटी को हाल ही में सम्मानित किया गया है।
यह सम्मान अमर उजाला, बागेश्वर की ओर से प्रदान किया गया। ज्ञात हो कि इस सम्मान समारोह का आयोजन ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, हल्द्वानी में किया गया था। समारोह में उत्तराखंड के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत समेत कई गणमान्य व्यक्तियों ने उपस्थित रहकर इस उपलब्धि का जश्न मनाया।
कला और मार्गदर्शन का समावेश
डॉ. दफौटी की शिक्षा प्रणाली में केवल शैक्षिक ज्ञान पर जोर नहीं दिया जाता है, बल्कि छात्रों की सामाजिक और कलात्मक प्रतिभाओं को भी बड़े स्तर पर प्रोत्साहित किया जाता है। उनके मार्गदर्शन में, कई छात्र राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर अद्वितीय सफलता प्राप्त कर चुके हैं।
यह शिक्षण प्रणाली केवल शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है; यह छात्रों के आत्मविश्वास को बढ़ाने और उन्हें विश्व स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए प्रेरित करने का काम भी करती है। डॉ. दफौटी के प्रयासों से कई छात्र ऐसे मंचों तक पहुंचे हैं जहां उन्होंने अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया है।
उच्च शिक्षा मंत्री का समर्थन
इस सम्मान समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि ऐसे शिक्षकों का योगदान न केवल छात्रों के जीवन में महत्वपूर्ण होता है, बल्कि यह समाज के भविष्य को भी उज्ज्वल बनाता है।
उन्होंने सराहना की कि डॉ. दफौटी जैसे शिक्षकों की मेहनत और लगन ही छात्रों की प्रतिभा को उन ऊंचाइयों पर पहुंचाने में मदद करती है, जिनका सपना वे देखते हैं।
समाज में बदलाव का एक आइना
डॉ. दफौटी की उपलब्धियाँ केवल व्यक्तिगत पुरस्कारों तक ही सीमित नहीं हैं। वे समाज में बदलाव का एक महत्वपूर्ण सूत्र भी बने हैं। उनके प्रेरणादायक कार्य के माध्यम से उन्होंने यह साबित किया है कि उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और सही मार्गदर्शन से हर छात्र अपनी सीमाओं को पार कर सकता है।
उनका यह कार्य शिक्षा की परिभाषा को नए आयामों में बदलने का संदेश देता है। उनकी मेहनत से न केवल सैलानी विद्यालय के छात्र आगे बढ़ रहे हैं, बल्कि समाज को भी यह दिखा रहे हैं कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होती।
भविष्य की संभावनाएँ
उम्मीद की जा रही है कि डॉ. दफौटी के इस सम्मान से अन्य शिक्षक भी प्रेरित होंगे और वे भी छात्रों के पूर्ण विकास के लिए प्रयत्नशील होंगे। बहुत से लोग मानते हैं कि शिक्षा में यही बदलाव ही देश के भविष्य को संवारने में मदद करेगा।
डॉ. दफौटी का यह सम्मान केवल एक शिक्षक के लिए उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह समाज के समग्र विकास की दिशा में एक कदम है। उनके अनुभव और मार्गदर्शन से छात्रों को सशक्त किया जा रहा है, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए नए उमंग और रास्ते देखे जा सकते हैं।
आने वाले समय में, यदि यही प्रयास जारी रखा गया तो न केवल उत्तराखंड बल्कि सम्पूर्ण देश में शिक्षा का स्तर ऊंचा उठ सकता है।
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