बागेश्वर में एनपीएस-यूपीएस के विरोध में कर्मचारियों ने मनाया काला दिवस, पुतला दहन से जताया आक्रोश

Oct 2, 2026 - 00:30
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बागेश्वर में एनपीएस-यूपीएस के विरोध में कर्मचारियों ने मनाया काला दिवस, पुतला दहन से जताया आक्रोश

बागेश्वर में एनपीएस-यूपीएस के विरोध में काला दिवस प्रदर्शन

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कम शब्दों में कहें तो, बागेश्वर में शिक्षक और कर्मचारी पुरानी पेंशन की बहाली की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे और काला दिवस मनाया। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने एनपीएस, यूपीएस और टीईटी का पुतला दहन कर अपने आक्रोश का इज़हार किया। यह आंदोलन पुरानी पेंशन बहाली राष्ट्रीय आंदोलन (एनएमओपीएस) के आह्वान पर किया गया।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

बागेश्वर, कपकोट और गरुड़ विकासखंड के शिक्षक और कर्मचारी संयुक्त रूप से इस आंदोलन में शामिल हुए। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य था, नई पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के खिलाफ आवाज उठाना और पुरानी पेंशन स्कीम की बहाली की मांग करना। एनएमओपीएस संगठन का यह दावा है कि एनपीएस कर्मचारियों के हितों की रक्षा नहीं कर सकता है और उन्हें अपने भविष्य के लिए पुरानी पेंशन स्कीम की आवश्यकता है।

पुतला दहन और आक्रोश

प्रदर्शनकारियों ने एनपीएस, यूपीएस और टीईटी का पुतला दहन किया। इस मौके पर उपस्थित शिक्षक और कर्मचारी एकजुट होकर अपने अधिकारों की सुरक्षा के लिए आवाज उठाते नजर आए। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे अपना आंदोलन तेज करेंगे। आंदोलन का समर्थन करते हुए कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे और कर्मचारियों के भविष्य के लिए पुरानी पेंशन की बहाली पर जोर दिया।

सरकार की अनसुनी से नाराज

एनएमओपीएस के सदस्यों ने कहा कि सरकार की अनदेखी और नई पेंशन प्रणाली का कार्यान्वयन कर्मचारियों के लिए संकट का कारण बन रहा है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह कर्मचारियों की भलाई के बजाय नीति बनाने में लापरवाह है। प्रदर्शनकारियों ने एकजुटता के साथ अपने अधिकारों की मांग की और चेतावनी दी कि किसी भी हालत में वे अपने हक से पीछे नहीं हटेंगे।

आगे की रणनीति

इस प्रदर्शन के बाद, एनएमओपीएस ने आने वाले दिनों में आक्रामक एवं व्यापक आंदोलन की तैयारी की है। संगठन के नेताओं ने मीडिया को बताया कि वे और अधिक जिलों में जाकर अपने आंदोलन को विस्तार देंगे और यदि जरूरत पड़ी तो वे भूख हड़ताल एवं अन्य विरोध प्रदर्शन करने पर भी विचार कर सकते हैं।

निष्कर्ष

इस प्रकार, बागेश्वर के शिक्षक और कर्मचारी अपने हक के लिए खुलकर एकजुट हुए हैं। यह न केवल उनकी पेशेवर सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह देश के समस्त कर्मचारियों के अधिकारों की लड़ाई का एक हिस्सा भी है। अब देखना यह है कि सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है।

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Team Discovery Of India
राधिका शर्मा

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