भागीरथी बिष्ट: हैदराबाद मैराथन में 42 किमी दौड़ में रजत पदक जीतकर बनीं गर्व का प्रतीक

Aug 30, 2026 - 16:30
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भागीरथी बिष्ट: हैदराबाद मैराथन में 42 किमी दौड़ में रजत पदक जीतकर बनीं गर्व का प्रतीक
भागीरथी बिष्ट: हैदराबाद मैराथन में 42 किमी दौड़ में रजत पदक जीतकर बनीं गर्व का प्रतीक

भागीरथी बिष्ट: हैदराबाद मैराथन में रजत पदक जीतकर बनीं गर्व का प्रतीक

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कम शब्दों में कहें तो, 24 वर्षीय भागीरथी बिष्ट ने अपनी कड़ी मेहनत और अनुशासन के दम पर हैदराबाद में 42 किलोमीटर की मैराथन दौड़ में रजत पदक जीता है। यह उपलब्धि न केवल उनके लिए बल्कि उत्तराखंड के लिए भी गर्व का क्षण है।

देवाल की बेटी ने रच दिया इतिहास

चमोली जिले के सीमांत वाण गांव की निवासी, भागीरथी बिष्ट ने उत्तराखंड का नाम एक बार फिर ऊँचा किया है। हैदराबाद में आयोजित मैराथन दौड़ में उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए, महज 2 घंटे 51 मिनट में 42 किलोमीटर की दूरी तय की। उनका यह प्रदर्शन उन्हें दूसरे स्थान पर पहुंचाने के साथ-साथ रजत पदक भी दिलाया।

कैसे की तैयारी?

भागीरथी की इस सफलता के पीछे उनकी कड़ी मेहनत और नियमित प्रशिक्षण है। उन्होंने वर्षों तक कठिन प्रशिक्षण लिया और अपनी दौड़ने की तकनीक को सुधारने के लिए विभिन्न विशेषज्ञों से परामर्श किया। उनका लक्ष्य हमेशा से ही अपने गांव और राज्य का नाम रोशन करना रहा है।

मुख्यमंत्री का सम्मान

भागीरथी की इस शानदार उपलब्धि पर तेलंगाना के मुख्यमंत्री अनुमुला रेवंत रेड्डी ने उन्हें मेडल प्रदान कर सम्मानित किया। यह सम्मान न केवल भागीरथी की मेहनत का परिणाम है, बल्कि उन सभी युवा खिलाड़ियों के लिए सन्देश भी देता है जो सोचते हैं कि कुछ भी असंभव नहीं।

भविष्य की योजनाएँ

भागीरथी बिष्ट ने इस सफलता के बाद बताया कि वे अब अगले मैराथन और दौड़ प्रतियोगिताओं में भाग लेने की तैयारी कर रही हैं। उनका सपना ओलंपिक में भाग लेना और वहां भी अपने राज्य का नाम रोशन करना है।

संदेश देते हुए लाभ

इस तरह की सफलताएं केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होतीं, बल्कि ये समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में भी सहायक होती हैं। भागीरथी का यह प्रयास सबके लिए प्रेरणादायक है कि कैसे लगन और मेहनत से किसी भी लक्ष्य को पाया जा सकता है।

भागीरथी बिष्ट की यह उपलब्धि हर युवा के लिए एक सन्देश है कि अगर आप अपनी मेहनत में यकीन रखते हैं, तो कहीं भी सफल हो सकते हैं। उनके इस ऐतिहासिक प्रयास ने निश्चित रूप से उत्तराखंड को एक नई पहचान दी है।

उनकी मेहनत और लगन उनके भविष्य में और भी सफलताएं दिलाने की क्षमता रखती है। यह न केवल भागीरथी के लिए, बल्कि हर एक ऐसे युवा खिलाड़ी के लिए एक सुनहरा अवसर प्रदर्शित करता है जो अपने सपनों को साकार करने के लिए संघर्ष कर रहा है।

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सादर,
टीम डिस्कवरी ऑफ इंडिया
- अंजलि शर्मा

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