मुकर्रम अंसारी का कांग्रेस छोड़ना: हरिद्वार में उठे नए राजनीतिक सवाल

Nov 9, 2025 - 16:30
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मुकर्रम अंसारी का कांग्रेस छोड़ना: हरिद्वार में उठे नए राजनीतिक सवाल
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मुकर्रम अंसारी का कांग्रेस छोड़ना: हरिद्वार में उठे नए राजनीतिक सवाल

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कम शब्दों में कहें तो, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मुकर्रम अंसारी ने पार्टी छोड़ने का फैसला लिया है, जो हरिद्वार एवं मैदान के मुद्दों पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और उनकी पुत्री अनुपमा रावत की चुप्पी से नाराज होकर किया गया।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मुकर्रम अंसारी ने हाल ही में एक प्रेस वार्ता में अपने इस्तीफे की घोषणा की। उन्होंने बताया कि चुनावी हलचल में अपने अनुभव के आधार पर ऐसा कदम उठाना जरूरी था। उनके अनुसार, पहाड़ी क्षेत्र के निवासियों के मुद्दों को भुला दिया गया है और उन्हें प्रमुखता से नहीं उठाया गया है। अंसारी ने इस बात पर भी जोर दिया कि हरिद्वार के विकास में पूरी तरह से उदासीनता बरती गई है।

पूर्व मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए मुकर्रम अंसारी

प्रेस वार्ता के दौरान अंसारी ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि अल्मोड़ा से तिरस्कृत होने के बाद हरीश रावत को हरिद्वार से सांसद बनाने की राजनीतिक महत्वाकांक्षा ही उनकी असफलता की कहानी बताती है। अंसारी ने यह भी आरोप लगाया कि रावत के परिवार ने कभी भी हरिद्वार के विकास के मुद्दों को अपनी राजनीतिक कार्यों की प्राथमिकताओं में शामिल नहीं किया।

मुकर्रम अंसारी ने तंज करते हुए कहा कि हरीश रावत की शासनकाल में कोई उल्लेखनीय उपलब्धि नहीं है। उन्होंने पूर्व विधायक स्वर्गीय अंबरीष कुमार के आदर्शों को याद करते हुए कहा कि उन जैसे नेता ही स्वच्छ राजनीति के प्रतीक थे।

काँग्रेस छोड़ने का निर्णय और भविष्य की योजनाएँ

अंसारी ने कांग्रेस छोड़ने का निर्णय लेते हुए मिशन-2027 को ध्यान में रखते हुए अपने राजनीतिक भविष्य की तरफ इशारा किया। उन्होंने बताया कि किसानों की बिजली बिलों में कोई रियायत न देना सरकार की दोहरी सोच को दर्शाता है। इसके साथ ही, उन्होंने हरिद्वार के लिए मूल-निवास प्रमाण पत्र पर जमीन के सर्किल रेट को ज्वालापुर से बाहर रखने के फैसले की निंदा की।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि हरिद्वार एवं उद्यमसिंह नगर की जनता पर बिजली बिल का बोझ डालना प्रमुखता से गलत था। उनकी बातें इस बार के चुनाव की रणनीतियों के हाव-भाव को भी दर्शाती हैं। अंसारी ने अपनी बातों में कई ग्राम प्रधानों और समर्थकों का भी उल्लेख किया, जिन्होंने उनके साथ पार्टी छोड़ी।

समर्थकों का समर्थन

इस मौके पर, पार्षद नईम कुरैशी, मुंसी शकील अहमद, नजाकत प्रधान सहित कई प्रमुख नेता और ग्राम प्रधान उपस्थित रहे। इन सभी ने अंसारी के विचारों का समर्थन किया और उनके प्रति एकजुटता दिखाई।

विडंबना यह है कि इस समय कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की राजनीति और उनकी कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह उठते नजर आ रहे हैं। अंसारी का यह कदम अन्य नेताओं को भी अपने कार्यों की समीक्षा करने पर मजबूर कर सकता है।

अंततः, मुकर्रम अंसारी का यह कदम हरिद्वार की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है। राजनीतिक पृष्ठभूमि और स्थानीय मुद्दों को ध्यान में रखते हुए, अब देखना यह होगा कि क्या अन्य नेता भी उनके साथ जुड़ते हैं या फिर इस चुप्पी को बनाए रखते हैं।

इससे यह स्पष्ट हो गया है कि हरिद्वार के विकास के लिए बहस और संवाद आवश्यक हैं, और जो नेता इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाएंगे, उन्हें नकारा जा सकता है।

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— Team Discovery Of India, साक्षी वर्मा

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