उत्तराखंड के विकास में दोहरे मापदंडों का खेल: झूठा नैरेटिव गढ़ने की कोशिश

Oct 15, 2025 - 08:30
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उत्तराखंड के विकास में दोहरे मापदंडों का खेल: झूठा नैरेटिव गढ़ने की कोशिश
उत्तराखंड के विकास में दोहरे मापदंडों का खेल: झूठा नैरेटिव गढ़ने की कोशिश

उत्तराखंड के विकास में दोहरे मापदंडों का खेल: झूठा नैरेटिव गढ़ने की कोशिश

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में विकास के प्रयासों को असफल बनाने के लिए विभिन्न समूह एक झूठा नैरेटिव बना रहे हैं। यह स्थिति देश में कोई नई नहीं है, लेकिन इसके परिणामस्वरूप सामाजिक स्थिति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

राज्य के विकास की स्थिति

देहरादून: जब भी कोई राज्य या नेतृत्व विकास की दिशा में ठोस कदम बढ़ाता है, तब सामाजिक, राजनीतिक और मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म उस प्रयास पर नकारात्मकता की छाया डालने की कोशिश करते हैं। उत्तराखंड में हाल ही में ऐसे ही प्रयासों ने राज्य के विकास को संदिग्ध बना दिया है। यह सिलसिला नया नहीं है। समय-समय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ या अब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर भी ऐसे ही आरोप लगाए गए हैं।

आधिकारिक प्रतिक्रियाएं

मुख्यमंत्री धामी ने हाल ही में कहा, "हमारा एकमात्र लक्ष्य उत्तराखंड का विकास है, और हम इसे प्रत्येक नागरिक के लिए सुलभ बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।" हालांकि, उनके प्रयासों को संदेह की निगाह से देखा जा रहा है। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार के नकारात्मकता के पीछे कुछ विशेष राजनीतिक समूहों का एजेंडा हो सकता है।

सामाजिक मीडिया का प्रभाव

हर दिन, सोशल मीडिया पर ऐसे पोस्ट और जानकारी साझा की जाती है, जो राज्य सरकार द्वारा की जा रही विकास योजनाओं की उपलब्धियों पर प्रश्न उठाती हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या ये सब कुछ ज्यादा ही योजनाओं का नकारात्मक प्रचार है? क्या इसके पीछे कोई राजनीतिक षडयंत्र है? ये सवाल निश्चित रूप से विचारणीय हैं।

स्थानीय नागरिकों की राय

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विकास के कार्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। हजारों लोग यहां की प्राकृतिक सुंदरता और संसाधनों का उपयोग करने के लिए प्रवासी बन गए हैं, और यही भारतीय संस्कृति का हिस्सा है। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा की जा रही योजनाएं और उनके पीछे का नैरेटिव बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

निष्कर्ष

अंत में यह कहा जा सकता है कि झूठे नैरेटिव और दोहरे मापदंडों के इस खेल में किसी का फायदा नहीं होगा, सिवाय इसके कि राज्य का विकास रुकता है। सभी पक्षों को मिलकर सकारात्मकता के साथ काम करने की आवश्यकता है, ताकि उत्तराखंड का विकास हो सके।

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— टीम डिस्कवरी ऑफ इंडिया, प्रिया शर्मा

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