उत्तराखंड: सीमांत गाँवों के विकास और पलायन रोकने के लिए ठोस कार्ययोजना का प्रारूप

Nov 20, 2025 - 08:30
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उत्तराखंड: सीमांत गाँवों के विकास और पलायन रोकने के लिए ठोस कार्ययोजना का प्रारूप
उत्तराखंड: सीमांत गाँवों के विकास और पलायन रोकने के लिए ठोस कार्ययोजना का प्रारूप

उत्तराखंड: सीमांत गाँवों के विकास और पलायन रोकने के लिए ठोस कार्ययोजना का प्रारूप

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के सचिव ग्राम्य विकास धीराज गर्ब्याल ने सभी जनपदों के अधिकारियों के साथ मिलकर सीमांत गाँवों के विकास और पलायन को रोकने हेतु एक ठोस कार्ययोजना तैयार करने के दिशा-निर्देश दिए हैं। यह पहल सीमांत गाँवों में विकास की गति को तेज करने और वहाँ के निवासियों को वहाँ रहकर अपने गाँवों में जीवन सुधारने में मदद करने के लिए की जा रही है।

समीक्षा बैठक में उठे मुद्दे

देहरादून में आयोजित एक विस्तृत समीक्षा बैठक में सचिव धीराज गर्ब्याल ने सभी जनपदों के अधिकारियों से कहा कि सीमांत गाँवों को उचित विकास की दृष्टि से प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनके अनुसार, इस विकास में स्वास्थ्य, शिक्षा, अवसंरचना, और रोजगार जैसे महत्वपूर्ण पहलू शामिल होने चाहिए।

पलायन की समस्या

समाज में बढ़ता पलायन एक गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। खासकर पहाड़ी क्षेत्रों से युवा पीढ़ी जो रोजगार और बेहतर सुविधाओं के लिए कॉर्पोरेट क्षेत्रों की ओर भाग रही है। सचिव ने कहा कि यदि समय रहते विकास कार्य नहीं किए गए तो यह पलायन और भी बढ़ सकता है।

कितनी मेहनती योजना जरूरी है

इस कार्ययोजना में ग्राम पंचायतों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए सचिव ने कहा कि उन्हें विकास में सक्रिय भागीदारी करनी होगी। ग्राम पंचायतों के माध्यम से स्थानीय लोगों की आवाज सुनकर उनकी समस्याओं का समाधान योजना में शामिल करना आवश्यक है।

निवेश को प्रोत्साहित करना

धीराज गर्ब्याल ने सुझाव दिया कि क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करना, खेती के आधुनिक तरीकों को अपनाना और स्थानीय संसाधनों का सही तरीके से उपयोग करना भी ज़रूरी है। इससे गाँवों में अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

आगे की राह

सचिव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे इस कार्ययोजना को एक गंभीरता से तैयार करें और आगामी बैठकों में अपने सुझाव और प्रगति का विवरण प्रस्तुत करें। यह योजना न केवल सीमांत गाँवों के विकास के लिए बल्कि पलायन को रोकने के लिए भी एक मजबूत आधारशिला साबित होगी।

यह विकास योजना न केवल सरकारी पहल होगी, बल्कि स्थानीय संगठनों, एनजीओ और समुदायों की भागीदारी भी इसको सफल बनाएगी।

अंत में, धीराज गर्ब्याल का मानना है कि यदि गाँवों के विकास पर सही साधनों और सोच के साथ कार्य किया गया, तो इन सीमांत गाँवों को बचाने का प्रयास सफल हो सकता है।

आगामी संवादों में हम इस प्रक्रिया की प्रगति का अनुसरण करेंगे। अधिक अपडेट के लिए यहां क्लिक करें.

Sincerely, Team Discovery Of India

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