उत्तराखंड: स्विमिंग टीचर को 5 साल की जेल, नौवीं की छात्रा से छेड़छाड़ का मामला

Dec 3, 2025 - 16:30
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उत्तराखंड: स्विमिंग टीचर को 5 साल की जेल, नौवीं की छात्रा से छेड़छाड़ का मामला
उत्तराखंड: स्विमिंग टीचर को 5 साल की जेल, नौवीं की छात्रा से छेड़छाड़ का मामला

उत्तराखंड: स्विमिंग टीचर को 5 साल की जेल, नौवीं की छात्रा से छेड़छाड़ का मामला

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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून की अदालत ने एक स्विमिंग टीचर को नौवीं की छात्रा से छेड़छाड़ के मामले में दोषी ठहराते हुए 5 साल कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले में न्यायालय ने पीड़िता को मुआवजे के रूप में 1 लाख रुपये भी देने का आदेश दिया।

मामले का विवरण

बातचीत के दौरान, यह पता चला है कि राजधानी देहरादून के एक स्विमिंग पूल में काम करने वाले शिक्षक ने छात्रा के साथ अनुचित व्यवहार किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए छात्रा के अभिभावकों ने शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की। अपर जिला एवं सेशन जज के सामने मामला पेश किया गया, जहाँ न्यायालय ने मामले की सुनवाई के दौरान सबूतों को ध्यान में रखते हुए आरोपी को दोषी करार दिया।

न्यायालय का फैसला

फास्ट ट्रैक कोर्ट (POCSO) की न्यायाधीश रजनी शुक्ला ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अगर वह इस जुर्माने का भुगतान नहीं करेगा, तो उसे अतिरिक्त कारावास का सामना करना पड़ेगा। न्यायालय ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए पीड़िता को 1 लाख रुपये का प्रतिकर दिया जाने का भी आदेश दिया, ताकि उसे मानसिक और भौतिक रूप से हुई क्षति के लिए मुआवजा मिल सके।

महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध

यह मामला उत्तराखंड में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों की ओर इशारा करता है। इस प्रकार के मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना की गई है। इससे पीड़ितों को न्याय जल्द मिल सकेगा और समाज में सुरक्षा की भावना बढ़ेगी।

समाज के प्रति जिम्मेदारी

समाज में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। स्विमिंग टीचर जैसे लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई यह दर्शाती है कि न्यायालय ऐसे मामलों को कितनी गंभीरता से लेता है। जबकि न्यायालयों का काम न्याय सुनिश्चित करना है, समाज को भी चाहिए कि वह ऐसे मामलों में जागरूकता बढ़ाए और सुरक्षा हेतु ठोस कदम उठाए।

निष्कर्ष

यह फैसला न केवल न्याय के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज में एक विश्वास की स्थापना भी करता है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी। हमें उम्मीद है कि आगे भी इस तरह के मामलों में त्वरित और प्रभावी न्याय पहुँचा जाएगा।

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सादर,
टीम डिस्कवरी ऑफ इंडिया
(प्रतिनिधि: अंजलि शर्मा)

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