देश के सुपर निशानेबाज उत्तरकाशी जिले में जन्मे यशपाल राणा का निधन खेल जगत में शोक की लहर

Jun 15, 2026 - 08:30
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देश के सुपर निशानेबाज उत्तरकाशी  जिले में जन्मे यशपाल राणा का निधन खेल जगत में शोक की लहर

Uttrakhnd. देश के दिग्गज निशानेबाज अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता और प्रसिद्ध कोच जसपाल राणा का निधन हो गया। वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और दिल्ली के मैक्स अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था। कुछ दिन पहले विदेश से लौटते समय विमान में उन्हें हृदयाघात आया था, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके निधन की खबर से खेल जगत, उत्तराखंड और पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है।

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में 28 जून 1976 को जन्मे जसपाल राणा भारतीय निशानेबाजी के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिने जाते थे। मूल रूप से नैनबाग क्षेत्र के निवासी जसपाल ने कम उम्र में ही अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। वर्ष 1994 में जापान के हिरोशिमा में आयोजित एशियाई खेल 1994 में उन्होंने 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया था। महज 18 वर्ष की आयु में हासिल की गई इस उपलब्धि ने उन्हें भारतीय शूटिंग का नया सितारा बना दिया था।

जसपाल राणा ने अपने करियर में एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और SAIF खेलों में कई स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया। वर्ष 1995 के चेन्नई और 1999 के काठमांडू SAIF खेलों में उन्होंने आठ-आठ स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रचा था। 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में उनकी दक्षता को आज भी भारतीय निशानेबाजी की मिसाल माना जाता है। खेलों में उनके असाधारण योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 1994 में अर्जुन पुरस्कार, 1997 में पद्म श्री और 2020 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया था। खिलाड़ी के रूप में सफलता हासिल करने के बाद उन्होंने कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली और भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जूनियर राष्ट्रीय टीम के कोच के रूप में उन्होंने कई प्रतिभाशाली निशानेबाज तैयार किए, जिनमें सौरभ चौधरी और अनीस भनवाला प्रमुख हैं। वह ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर के भी कोच रहे। वर्ष 2024 के पेरिस ओलंपिक में मनु भाकर द्वारा जीते गए दो ऐतिहासिक कांस्य पदकों के पीछे जसपाल राणा के मार्गदर्शन को अहम माना जाता है। राष्ट्रीय राइफल संघ ने उन्हें 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा के लिए हाई-परफॉर्मेंस कोच की जिम्मेदारी भी सौंपी थी।

जसपाल राणा के निधन से भारतीय निशानेबाजी ने अपना एक मजबूत स्तंभ खो दिया है। खेल जगत की कई हस्तियों, खिलाड़ियों और उनके शिष्यों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को हमेशा याद रखने की बात कही है।

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