देहरादून: पीएम मोदी का पहाड़ी अंदाज, बोली और संस्कृति का अद्भुत संगम
देहरादून: पीएम मोदी का पहाड़ी अंदाज, बोली और संस्कृति का अद्भुत संगम
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कम शब्दों में कहें तो, रविवार को उत्तराखंड के रजत जयंती समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी ने पहाड़ी संस्कृति और बोली से गहरा कनेक्शन बनाया।
उत्तराखंड के रजत जयंती में विशेष पीएम मोदी का भाषण
उत्तराखंड की रजत जयंती के मुख्य कार्यक्रम में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी बातों में गढ़वाली और कुमाऊनी बोली का ऐसा प्रयोग किया कि उन्होंने वहां मौजूद हर व्यक्ति के दिल को छू लिया। इस कार्यक्रम में पहाड़ी टोपी पहनकर जब उन्होंने भाषण दिया, तो उनके शब्दों में पहाड़ी लोक पर्वों से लेकर दयारा बुग्याल के बटर फेस्टिवल तक का उल्लेख विशेष रूप से शामिल रहा।
पहाड़ी बोली का महत्व और केंद्रीय नेतृत्व
पीएम मोदी ने साफ तौर पर एक नया संदेश दिया कि वह उत्तराखंड की संस्कृति को सराहते हैं। पहाड़ी बोली के प्रति उनका प्रेम और सम्मान न केवल उनके भाषणों में दिखा, बल्कि उन्होंने गढ़वाली और कुमाऊनी की महत्ता को भी सभी के सामने रखा। यह न केवल उत्तराखंड के निवासियों के लिए गर्व की बात थी, बल्कि यह दर्शाता है कि राष्ट्रीय स्तर पर भी स्थानीय भाषाओं और संस्कृतियों को महत्व दिया जा रहा है।
सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने का प्रयास
इस तरह के कार्यक्रम यह संकेत देते हैं कि सरकार स्थानीय सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के प्रति गंभीर है। पीएम मोदी ने इस बार पहाड़ी संस्कृति और उसकी सुंदरता को दर्शाने के लिए मंच का प्रभावी उपयोग किया। इससे पहले शायद ही किसी प्रधानमंत्री ने इतनी संख्या में पहाड़ी भाषाओं का बखान किया हो।
संदेश की गहराई
यह विशेष कार्यक्रम केवल रजत जयंती का उत्सव नहीं था, बल्कि यह उत्तराखंड के विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक भी था। पीएम मोदी ने लोगों से अपील की कि वे अपनी संस्कृति को आगे बढ़ाने में सक्रिय योगदान दें। इस बहुआयामी संवाद का मुख्य उद्देश्य था, पहाड़ी बोली और संस्कृति को न केवल बचाना, बल्कि उसे पुनर्जीवित करना भी।
उत्तराखंड के इस प्रकार के प्रमुख कार्यक्रमों में, पीएम मोदी ने उम्मीद जगाई है कि आने वाले समय में और भी अधिक पहाड़ी बोली और संस्कृति को बढ़ावा दिया जाएगा।
इस पूरे कार्यक्रम में पीएम मोदी का हर अंदाज पहाड़ी था, जो उन्होंने पहाड़ी टोपी पहनकर परिलक्षित किया। उनका यह प्रयास इस बात का प्रमाण है कि वे वास्तविकता में उत्तराखंड की जनता से जुड़े हुए हैं।
अंत में, यह कहा जा सकता है कि पीएम मोदी ने अपने भाषण के माध्यम से केवल उत्तराखंड की भाषा, संस्कृति और परंपराओं का जिक्र नहीं किया, बल्कि यह दिखाने का प्रयास किया कि वे वहां की जनता के दिल के करीब हैं।
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सादर, टीम डिस्कवरी ऑफ इंडिया, प्रिया शर्मा
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