लोकपर्व इगास: हमारी सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक — सीएम धामी
लोकपर्व इगास: हमारी सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक — सीएम धामी
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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री धामी ने इगास पर्व को एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर बताकर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ दी हैं।
आज मुख्यमंत्री आवास में इगास पर्व का भव्य आयोजन हर्ष और उल्लास के साथ किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि इगास पर्व हमारे संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। यह पर्व, जिसे बूढ़ी दीवाली भी कहा जाता है, हमारी पारंपरिक आस्था और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है।
इगास पर्व का महत्व
इगास पर्व को उत्तराखंड की लोकसंस्कृति में विशेष स्थान प्राप्त है। यह पर्व सदियों से मनाया जा रहा है और इसका आयोजन खासी धूमधाम से किया जाता है। इगास पर्व का अभिप्राय न केवल दीपावली के त्योहार से है, बल्कि यह हमारे पर्वतीय क्षेत्र की सांस्कृतिक विविधता और समृद्ध परंपराओं को भी दर्शाता है।
मुख्यमंत्री धामी ने इस अवसर पर यह भी संकल्प लिया कि वे लोकसंस्कृति के संरक्षण हेतु निरंतर प्रयास करेंगे और अपनी संस्कृति के मूल्यांकों को बढ़ावा देंगे। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के पर्वों के माध्यम से हमें अपनी सांस्कृतिक धरोहर की पहचान करनी चाहिए और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना चाहिए।
गौरव एवं उल्लास के साथ मनाने की परंपरा
मुख्यमंत्री धामी के साथ इस पर्व में प्रदेश के कई गणमान्य व्यक्तियों और आम जनता ने भी भाग लिया। यहाँ पर विभिन्न पारंपरिक गीत और नृत्य प्रस्तुत किए गए, जो पर्व की महत्ता को और बढ़ाते हैं।
इगास पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह हमारे सामाजिक एकता का भी एक मजबूत आधार है। इस दिन लोग एक-दूसरे के साथ मिलकर खुशियाँ बाँटते हैं और संस्कृति को मनाते हैं। इसके अलावा, यह पर्व हमें हमारी जड़ों से जोड़े रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
संरक्षण का संकल्प
मुख्यमंत्री धामी ने उल्लेख किया कि आज के समय में जब हमारी संस्कृति लगातार विदेशी प्रभावों के संपर्क में आ रही है, ऐसे में हमें अपनी पहचान को बनाए रखने की आवश्यकता है। उन्होंने युवा पीढ़ी से आग्रह किया कि वे अपनी संस्कृति को संजोए रखें और इसे आगे बढ़ाएँ।
इस प्रकार, इगास पर्व मात्र एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमारी गौरवशाली परंपराओं की रक्षा करने का संकल्प है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सबको मिलकर अपने लोक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को सहेजने की दिशा में कदम बढ़ाने चाहिए।
अंत में, उन्होंने सभी को एक बार फिर शुभकामनाएँ दीं और बताया कि इस पर्व को मनाते समय हमें मात्र खुशी के साथ-साथ अपनी जिम्मेदारियों को भी याद रखना चाहिए।
इस पर्व के माध्यम से प्रदेशवासियों ने अपने सांस्कृतिक धरोहर को नए सिरे से जीने का संकल्प लिया है।
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टीम डिस्कवरी ऑफ इंडिया — सुषमा रानी
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