प्रयागराज माघ मेला 2026: शंकराचार्य का अपमान, कांग्रेस का मौन व्रत, भाजपा पर गंभीर आरोप
प्रयागराज माघ मेला 2026: शंकराचार्य का अपमान, कांग्रेस का मौन व्रत, भाजपा पर गंभीर आरोप
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कम शब्दों में कहें तो, प्रयागराज माघ मेला 2026 के दौरान ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुए कथित अभद्रता के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी बागेश्वर ने मौन व्रत का आयोजन किया है, जिसमें भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
बागेश्वर के बागनाथ मंदिर के प्रांगण में आयोजित इस मौन व्रत में कांग्रेस पार्टी के सदस्यों ने उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन की निंदा की। यह विरोध कार्यक्रम शनिवार को नगर अध्यक्ष मनोज साह के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जहां पार्टीे के कार्यकर्ताओं ने दो घंटे तक मौन व्रत रखते हुए अपनी चिंता और आक्रोश व्यक्त किया।
क्यों उठाए गए ये विरोध के स्वर?
कथित तौर पर, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की रथ यात्रा को निषिद्ध कर दिया गया और उन्हें गंगा स्नान से वंचित रखा गया। इससे ना केवल उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई, बल्कि यह सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण घटना है। कांग्रेस ने इसे धार्मिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन मानते हुए इसे गंभीरता से लिया है।
इस मौन व्रत के दौरान कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता यह दावा कर रहे थे कि भाजपा सरकार जानबूझकर धर्म और परंपराओं का अपमान कर रही है। कांग्रेस के स्थानीय नेता मनोज साह ने कहा, “हम इस अभद्रता के खिलाफ खड़े होंगे और हर संभव कदम उठाएंगे ताकि धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों की रक्षा की जा सके।”
भाजपा पर लगाए गए आरोप
इस विरोध प्रदर्शन के प्रमुख कारणों में भाजपा पर धार्मिक नफरत फैलाने का आरोप शामिल है। कांग्रेस ने कहा है कि सरकार की कार्रवाई एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देना है। भाजपा को घेरे में लेते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पार्टी धार्मिक स्थलों और महापुरुषों के प्रति इज्जत नहीं रखती है।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों ने इस मौन व्रत का समर्थन किया, और कई लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए। स्थानीय निवासी ने कहा, “धर्म और आस्था के साथ खेलने की किसी को अनुमति नहीं होनी चाहिए।” कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों का मानना था कि इस तरह की घटनाएं समाज में अलगाव पैदा करती हैं।
कांग्रेस का मानना है कि एकजुटता का यह भाव ही धार्मिक अभिव्यक्ति की रक्षा कर सकता है। ऐसे मौन व्रत और प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि लोग अपनी धार्मिक स्वतंत्रता के प्रति जागरूक हैं और इसके लिए किसी भी तरह का आंदोलन करने के लिए तैयार हैं।
निष्कर्ष
इस विरोध के माध्यम से कांग्रेस ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि वे धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए तत्पर हैं। यह मौन व्रत न केवल वर्तमान मुद्दे पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, बल्कि समाज में धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा देने का भी प्रयास है।
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साभार, टीम डिस्कवरी ऑफ इंडिया - राधिका जोशी
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