बागेश्वर: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद खनन विवाद, प्रशासन ने रुकवाया मशीन से खनन कार्य
बागेश्वर: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद खनन विवाद, प्रशासन ने रुकवाया मशीन से खनन कार्य
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कम शब्दों में कहें तो, सुप्रीम कोर्ट द्वारा बागेश्वर की 29 खड़िया खदानों को खुलने की अनुमति दिए जाने के बाद खनन संबंधी कई विवाद उठने लगे हैं। प्रशासन ने तुरंत कदम उठाते हुए एक पट्टाधारक द्वारा मशीनों से खनन के कार्य को रोक दिया.
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने बागेश्वर जनपद के 29 खड़िया खदानों को संचालन की अनुमति दी। हालांकि, इस निर्णय का प्रभाव जिला प्रशासन पर पड़ने लगा है, जिससे खनन के संबंध में भ्रम और विवाद उत्पन्न हो रहा है।
खनन की प्रक्रिया में विवाद
भैरूचौबट्टा क्षेत्र में एक खनन पट्टाधारक ने मशीनों के माध्यम से खड़िया खनन का कार्य शुरू कर दिया। यह कदम स्थानीय निवासियों और पर्यावरण प्रेमियों के लिए चिंता का विषय बन गया। खनन कार्य के शुरू होने के बाद, शिकायतें मिलने पर प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की।
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई
प्रशासन ने जांच के बाद पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचकर खनन कार्य को रुकवा दिया। यह कदम विवाद की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया। क्षेत्र में इससे पहले कोई भी औपचारिक रूप से खनन की अनुमति नहीं दी गई थी, ऐसे में यह कार्रवाई उचित प्रतीत होती है।
स्थानीय जनता की प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासियों में इस स्थिति को लेकर काफी चिंताएँ हैं, क्योंकि खनन गतिविधियाँ पर्यावरण को नुकसान पहुँचा सकती हैं। कई स्थानीय नेता और पर्यावरणविद भी इस मुद्दे पर आवाज उठा रहे हैं, जिससे यह मामला और भी गर्म होता जा रहा है।
आगे की संभावनाएँ
अब यह देखना है कि प्रशासन इस मामले को किस तरह से आगे बढ़ाएगा और क्या सुप्रीम कोर्ट का निर्णय वास्तव में स्थानीय निवासियों और पर्यावरण के साथ समंजस्य बना सकेगा।
इस मामले पर जनता के बीच जागरूकता फैलाने के लिए सूचना सत्र आयोजित किए जा सकते हैं, जिससे लोग खनन की प्रक्रिया और उसके प्रभावों के बारे में और अधिक जान सकें।
फिलहाल, प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच संवाद बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण होगा ताकि सभी हितों को समझा जा सके और किसी भी संभावित संकट से बचा जा सके।
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सादर,
टीम डिस्कवरी ऑफ इंडिया
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