गैर काष्ठ वन उपज का विकास एवं हर्बल एयरोमा टूरिज्म पर विशेष कार्यशाला का आयोजन

Jan 24, 2026 - 08:30
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गैर काष्ठ वन उपज का विकास एवं हर्बल एयरोमा टूरिज्म पर विशेष कार्यशाला का आयोजन
गैर काष्ठ वन उपज का विकास एवं हर्बल एयरोमा टूरिज्म पर विशेष कार्यशाला का आयोजन

गैर काष्ठ वन उपज का विकास एवं हर्बल एयरोमा टूरिज्म पर विशेष कार्यशाला का आयोजन

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कम शब्दों में कहें तो, बागेश्वर में "गैर काष्ठ वन उपज का विकास एवं हर्बल एयरोमा टूरिज्म" परियोजना पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन हुआ, जिसमें 70 वन पंचायतों के सरपंच एवं 120 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

बागेश्वर के चिंतन मंथन सभागार में, प्रभागीय वनाधिकारी आदित्य रत्न की गरिमामयी उपस्थिति में इस कार्यशाला का आयोजन हुआ। इस अवसर पर प्रमुख वन संरक्षक (वन पंचायत) द्वारा उच्च स्तर की जानकारी साझा की गई। कार्यशाला में उत्तराखंड की बनस्पतियों के उचित उपयोग तथा गैर काष्ठ वन उत्पादों के विकास पर जोर दिया गया।

कार्यशाला का उद्देश्य

इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य था प्रतिभागियों को गैर काष्ठ वन उपज के सृजन और उपयोगिताओं के बारे में जागरूक करना। विभिन्न वन पंचायतों के प्रतिनिधियों ने इसकी उपयोगिता और आर्थिक संभावनाओं पर चर्चा की। यह कार्यक्रम न केवल वन उपज के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि क्षेत्र में हर्बल और एरोमा टूरिज्म को बढ़ावा देने का भी एक प्रयास है।

इसके महत्व की चर्चा

उत्तराखंड जैसे पहाड़ी क्षेत्र में, जहां औषधीय पौधों की भरपूर प्रजातियां पाई जाती हैं, वहाँ हर्बल टूरिज्म और एरोमा टूरिज्म के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त किया जा सकता है। इससे न केवल स्थानीय लोगों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों से प्राप्त जानकारी

कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताया कि गैर काष्ठ वन उपज का सही तरीके से विकास और विपणन करने से ग्रामीणों को अधिकतम लाभ मिल सकता है। इसके साथ ही, इसे अपनाने से वन संरक्षण में भी सहायता मिलेगी, जिससे प्राकृतिक संसाधनों का टिकाऊ उपयोग किया जा सकेगा।

प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया

इस कार्यशाला में शामिल प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से उन्हें नई जानकारी मिली, जो उन्हें अपनी पंचायतों में लागू करने में मदद करेगी। उनका मानना है कि इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर होना चाहिए।

भविष्य की योजनाएँ

कार्यशाला के अंत में, आयोजकों ने इस प्रकार के प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने की योजना बनाई है, जिससे अधिक से अधिक लोगों को इस क्षेत्र में शिक्षित किया जा सके। इस क्षेत्र के विकास के लिए यह एक सकारात्मक कदम है।

अंत में, यह कार्यशाला स्थानीय वन पंचायतों के पुनर्निर्माण में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई है। इसके माध्यम से न केवल वन उपज का संवर्धन होगा, बल्कि पर्यटन के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं उत्पन्न होंगी।

अधिक जानकारी के लिए हमने एक लिंक प्रदान किया है।

सादर, टीम डिस्कवरी ऑफ इंडिया

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