संघर्ष वाहिनी की निंदा: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर हमले का विरोध

Jan 21, 2026 - 08:30
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संघर्ष वाहिनी की निंदा: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर हमले का विरोध
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संघर्ष वाहिनी की निंदा: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर हमले का विरोध

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कम शब्दों में कहें तो, संघर्ष वाहिनी ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों पर हुए निंदनीय हमले को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। इस घटना को लेकर लोगों ने उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार और वहां की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। बागनाथ मंदिर में एक विशेष हवन का आयोजन किया गया, जिसमें धार्मिक एकता और शांति की प्रार्थना की गई।

हमले की गंभीरता और प्रतिक्रिया

पिछले दिनों शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके अनुयायियों के साथ दुर्व्यवहार, बदसलूकी और मारपीट की घटना ने समाज के विभिन्न तबकों में रोष उत्पन्न किया है। संघर्ष वाहिनी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह हमला न केवल शंकराचार्य और उनके शिष्यों के गुजरात मंत्रालय में जाकर ऐसा करने का एक उदाहरण है, बल्कि यह समग्र सनातन धर्म पर भी एक हमला है।

उत्तर प्रदेश सरकार की कानून व्यवस्था पर सवाल

इस घटनाक्रम के बाद से, नाराज लोगों ने उत्तर प्रदेश सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है। इससे पहले भी धार्मिक स्थलों पर ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं, जो समाज में अनावश्यक तनाव पैदा करती हैं। इस प्रकार की घटनाओं के पीछे राजनीतिक कारणों की भी चर्चा की जा रही है, जिसके तहत अल्पसंख्यक समुदायों को भड़काने का प्रयास किया जाता है।

बागनाथ मंदिर का महत्व

बागनाथ मंदिर का भारतीय संस्कृति और हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण स्थान है। शंकराचार्य ने यहां बागनाथ की पूजा करने के बाद एक हवन का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य सनातन धर्म की रक्षा के लिए शक्ति प्राप्त करना था। इससे यह पता चलता है कि धार्मिक स्थलों की रक्षा और उनके महत्व को समझना किसी भी समाज के लिए अति आवश्यक है।

समाज में एकता की आवश्यकता

संघर्ष वाहिनी ने इस घटना की निंदा करने के साथ-साथ समाज में एकता और सहिष्णुता की अपील की है। उन्होंने कहा कि ऐसे हमले हमारे समाज के लिए घातक हैं और इसे रोकने के लिए सभी वर्गों को एकजुट होना चाहिए। धार्मिक सहिष्णुता और अंतर-धार्मिक संवाद का समन्वय आवश्यक है ताकि ऐसे घटनाओं को भविष्य में रोका जा सके।

इस निंदनीय घटना पर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने भी अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। कुछ नेताओं ने इसे राजनीतिक खेल करार दिया है, जबकि अन्य ने त्वरित कार्यवाई करने की मांग की है।

इसके अलावा, संघर्ष वाहिनी ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की भी मांग की है। धार्मिक गुरुओं, खासकर उन लोगों की सुरक्षा जो समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, अत्यंत आवश्यक है।

इस प्रकार, यह न केवल एक हमला है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर को चुनौती देने का एक प्रयास भी है। सभी को मिलकर इस प्रकार की कोशिशों का विरोध करना होगा।

और अधिक अपडेट के लिए कृपया हमारी वेबसाइट Discovery Of The India पर जाएं।

Team Discovery Of India, राधिका शर्मा

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