बागेश्वर में जनपद स्तरीय संस्कृत प्रतियोगिताओं का भव्य समापन, 64 प्रतिभागियों का राज्यस्तर के लिए चयन
बागेश्वर में जनपद स्तरीय संस्कृत प्रतियोगिताओं का grand समापन
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कम शब्दों में कहें तो, बागेश्वर में द्विदिवसीय जनपद स्तरीय संस्कृत प्रतियोगिताओं का भव्य समापन हुआ है, जिसमें 64 प्रतिभागियों को राज्यस्तर के लिए चुना गया है।
बागेश्वर : पीएम श्री विक्टर मोहन जोशी स्मारक राजकीय इंटर कॉलेज बागेश्वर में हाल ही में आयोजित दो दिवसीय जनपद स्तरीय संस्कृत छात्र प्रतियोगिताओं का रंगारंग समापन हुआ। उत्तराखंड संस्कृत अकादमी द्वारा संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन, और प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से यह प्रतियोगिताएं आयोजित की गई थीं।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में जिला पंचायत उपाध्यक्ष विशाखा खेतवाल उपस्थित थीं, जिन्होंने प्रतियोगिता में भाग ले रहे विद्यार्थियों की प्रशंसा की। विशाखा खेतवाल ने कहा, "संस्कृत हमारी सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा है। यह प्रतियोगिता इसका प्रचार-प्रसार करने का एक उत्कृष्ट माध्यम है।"
प्रतियोगिताओं में विभिन्न विषयों पर प्रतिभागियों ने अपने ज्ञान और कौशल का प्रदर्शन किया। इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छात्रों ने न केवल अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया, बल्कि संस्कृत के प्रति अपनी रुचि भी व्यक्त की। 64 प्रतिभागियों को राज्यस्तर के लिए चयनित किया गया, जो आगे की चुनौतियों का सामना करने के लिए तत्पर हैं।
उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के निदेशक ने भी इस अवसर पर युवाओं को संस्कृत सीखने और इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा, "संस्कृत अध्ययन के माध्यम से हम न केवल भाषा को सहेज सकते हैं, बल्कि हमारी संस्कृति और परंपराओं को भी उजागर कर सकते हैं।"
इस प्रतियोगिता के समापन समारोह में सभी विजेताओं को पुरस्कार वितरण किया गया। यह युवा प्रतिभागी अब अगले चरण की तैयारी में जुट जाएंगे, जहाँ वे राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में अपनी क्षमताओं का परीक्षण करेंगे।
संस्कृत के प्रति इस उत्साह को देखकर यह स्पष्ट है कि युवा पीढ़ी सांस्कृतिक धरोहर को बचाने के लिए तत्पर है। इस प्रकार की प्रतियोगिताएँ न केवल छात्रों को भाषा सीखने का अवसर प्रदान करती हैं, बल्कि उन्हें संस्कृत अध्ययन के प्रति जागरूक भी करती हैं।
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प्रतियोगिताओं ने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि संस्कृत भाषा के प्रति युवा पीढ़ी का रुचि दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। इसे हमें संजोकर रखना है और आगे बढ़ाने का प्रयास करना है।
टिप्पणियों के लिए: इस प्रतिस्पर्धा ने छात्रों में न केवल शिक्षा की भावना जगाई है, बल्कि इसके माध्यम से संस्कृत के प्रति जागरूकता भी फैलाई है। हमें इस प्रकार के आयोजनों को बढ़ावा देना चाहिए ताकि हमारी सांस्कृतिक धरोहर सुरक्षित रहे।
संपादक: सुमन कुमारी, टीम डिस्कवरी ऑफ इंडिया
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