बागेश्वर में बढ़ते अपराधों के खिलाफ संघर्ष वाहिनी का धरना एवं छात्र नेता पर हमले का विरोध

Nov 6, 2025 - 08:30
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बागेश्वर में बढ़ते अपराधों के खिलाफ संघर्ष वाहिनी का धरना एवं छात्र नेता पर हमले का विरोध
बागेश्वर में बढ़ते अपराधों के खिलाफ संघर्ष वाहिनी का धरना एवं छात्र नेता पर हमले का विरोध

बागेश्वर में बढ़ते अपराधों के खिलाफ संघर्ष वाहिनी का धरना

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कम शब्दों में कहें तो, बागेश्वर संघर्ष वाहिनी ने स्थायी रूप से बढ़ती अपराधिक घटनाओं और छात्र नेता अंकुर उपाध्याय पर घात लगाकर किए गए हमले के खिलाफ महात्मा गांधी पार्क में एक सांकेतिक धरना आयोजित करने का निर्णय लिया। इस धरने का मुख्य उद्देश्य समाज में सुरक्षा की स्थिति को बेहतर बनाना और अपराध के प्रति जागरूकता फैलाना है।

धरने की पृष्ठभूमि

हाल के दिनों में बागेश्वर में हो रही अपराधिक घटनाओं ने जनसामान्य में चिंता का विषय बना दिया है। संघर्ष वाहिनी ने यह धरना उन घटनाओं के विरोध में आयोजित किया, जिसमें छात्र नेता अंकुर उपाध्याय को निशाना बनाया गया। इस हमले से स्थानीय छात्रों में भी भय का माहौल व्याप्त हो गया है।

प्रशासन के साथ वार्ता

धरने की शुरुआत से पहले, संघर्ष वाहिनी के पदाधिकारी कोतवाली पहुंचे और प्रभारी निरीक्षक के साथ वार्ता की। उन्होंने अपने विचार रखे कि जनपद में अपराधों की वृद्धि रुकने की आवश्यकता है। प्रभारी निरीक्षक ने संगठन को आश्वासन दिया कि संबंधित आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उल्लेखनीय है कि जीवन कनौली, पवन दानू, विनोद दानू और एक अन्य आरोपी के खिलाफ धारा 118(1) और 351(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

सामाजिक सुरक्षा के मुद्दे पर निगाह

बागेश्वर संघर्ष वाहिनी का यह धरना न केवल अपराधों के खिलाफ एक आवाज है, बल्कि यह समाज में सुरक्षा और शांति की स्थापना के लिए भी सकारात्मक कदम है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि छात्रों और आम नागरिकों को अपने जीवन में कोई खतरा न हो, स्थानीय प्रशासन को सजग रहने की आवश्यकता है।

धार्मिक और सशक्तिकरण के लिए संवाद

संघर्ष वाहिनी के सदस्यों का मानना है कि केवल धरने से समस्या का समाधान नहीं हो सकता। इसके लिए सार्वजनिक संवाद, शिक्षा और जागरूकता अभियान जरूरी है, ताकि लोग अपराधों के प्रति सर्तक रहें और प्रशासन पर दबाव बनाते रहें।

समाज के सभी स्तरों से समर्थन की आवश्यकता

इसी क्रम में, स्थानीय निवासियों और छात्रों को भी इसे एक संगोष्ठी के रूप में देखना चाहिए, जिसमें वे अपनी आवाज उठाएं और प्रशासन की ओर से अपेक्षाएं स्पष्ट करें। संविधान प्रदत्त अधिकारों का उपयोग कर वे अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।

निष्कर्ष

बागेश्वर संघर्ष वाहिनी का यह धरना एक महत्वपूर्ण संदेश है। यह न सिर्फ अपराध के प्रति विरोध का प्रतीक है, बल्कि समाज में सुरक्षा और एकजुटता के प्रतीक के रूप में भी देखा जा रहा है। जनता की सक्रिय भूमिका और प्रशासन की सतर्कता से ही इस समस्या का समाधान संभव है।

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सादर,
टीम डिस्कवरी ऑफ इंडिया, स्नेहा वर्मा

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