हरिद्वार में अंकिता भंडारी हत्या मामले की सीबीआई जांच की मांग: हरिश रावत के नेतृत्व में कांग्रेस का मार्च
हरिद्वार में अंकिता भंडारी हत्या मामले की सीबीआई जांच की मांग: हरिश रावत के नेतृत्व में कांग्रेस का मार्च
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कम शब्दों में कहें तो, पूर्व मुख्यमंत्री हरिश रावत के नेतृत्व में हरिद्वार में कांग्रेस ने अंकिता भंडारी हत्या मामले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर एक मार्च आयोजित किया। इस मामले को लेकर पूरे उत्तराखंड में कांग्रेस द्वारा नारेबाजी की गई।
अशोक गिरी, हरिद्वार
प्रेस विज्ञप्ति में एडवोकेट फरमान अली ने जानकारी दी कि आज बहन अंकिता भंडारी हत्या कांड की सीबीआई जांच की मांग को लेकर कांग्रेस जनों ने हरिद्वार में कई स्थानों पर मार्च निकाला। इस अवसर पर पूर्व प्रदेश सचिव राव फरमान अली ने कहा कि "पूरा उत्तराखंड अंकिता भंडारी हत्या कांड की सही जांच की मांग कर रहा है, लेकिन बीजेपी मौन है।" उन्होंने आगे कहा कि जनता उस विशेष आईपी का नाम जानना चाहती है, जिसके दबाव में अंकिता पर घिनौने कार्य करने का बोझ डाला गया था। जब उसने ऐसा करने से मना किया, तो उसकी हत्या कर दी गई।
राव ने कहा, "लोगों का मानना है कि बीजेपी अपने नेता को बचाने में जुटी हुई है, और सीबीआई जांच नहीं कराना चाहती है।" पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष राव आफाक अली ने टिप्पणी की कि वर्तमान सरकार ने साक्ष्य मिटाने के लिए उस रिजॉर्ट में बुलडोजर चलवाया है। इस प्रकार, अंकिता की हत्या के असली अपराधियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
उनकी बातों को समर्थन देते हुए, राव आफाक जी ने आगे कहा कि बीजेपी नेता की कथित पत्नी द्वारा जारी एक ऑडियो ने पूरे उत्तराखंड में हलचल मचा दी है। यह जरूरी है कि हत्या कांड के असली अपराधियों को उजागर किया जाए। अगर कांग्रेस इस मामले को लेकर सड़क पर आंदोलन करने का निर्णय ले चुकी है, तो यह दर्शाता है कि पार्टी इस गंभीर मामले को बहुत गंभीरता से ले रही है।
इस मार्च में राजबीर चौहान, वरुण बालियान, तेलूराम प्रधान, महेश प्रताप राणा, विधायक रवि बहादुर, डॉ. संजय पालीवाल, जिला अध्यक्ष बालेश्वर और कई अन्य कांग्रेस नेता शामिल थे। उनके साथ सैकड़ों कार्यकर्ता भी मौजूद थे। यह मार्च हरिद्वार में इस स्थानों पर आयोजित किया गया, जहाँ पर बड़ी संख्या में लोग जुटे।
इस पूरे मामले में अगर ध्यान दिया जाए तो यह केवल एक हत्या का मामला नहीं है, बल्कि यह सत्ता की उन कवायदों का भी प्रतीक है, जिसमें राजनीतिक संरक्षण और न्याय की असमानता का मामला खुलकर सामने आता है। मोदी सरकार के कार्यकाल में इस तरह की घटनाएँ इंगित करती हैं कि किस प्रकार सत्ता में बैठे लोग अपने विशेष लाभ के लिए उचित प्रक्रियाओं को दरकिनार कर सकते हैं।
अगर भाजपा वास्तव में हत्या के असली गुनहगारों को सजा देना चाहती है, तो उसे सीबीआई जांच की अनुमति देनी चाहिए। अन्यथा, ये सब इंसाफ की मांग करने वाले लोग निराश होंगे, और इससे पार्टी की छवि भी प्रभावित होगी।
कांग्रेस द्वारा किए गए इस आंदोलन को लेकर जो हलचल मची है, वह साबित करती है कि जनता न्याय की उम्मीद करती है और वह अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरेगी।
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— Team Discovery Of India, सुषमा पाटिल
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