हरिद्वार में “दस्तक” काव्य गोष्ठी: युवा रचनाकारों की अनूठी अभिव्यक्ति
हरिद्वार में “दस्तक” काव्य गोष्ठी: युवा रचनाकारों की अनूठी अभिव्यक्ति
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कम शब्दों में कहें तो, हरिद्वार में हुई “दस्तक” काव्य गोष्ठी ने युवा साहित्यकारों की आवाज़ को एक सशक्त मंच प्रदान किया। इस अनूठे आयोजन ने साहित्य प्रेमियों के दिलों में एक अलग स्थान बनाया।
उत्कृष्ट रचनाओं की गूंज
हरिद्वार। राष्ट्रीय कवि संगम द्वारा आयोजित “दस्तक” काव्य गोष्ठी न केवल एक कलात्मक अवसर था, बल्कि यह युवा कवि-कवयित्रियों के लिए अपनी रचनाओं को प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण मंच भी बना। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से युवा साहित्यकारों ने भाग लिया और अपनी सशक्त रचनाओं के माध्यम से समाज, संस्कृति, संवेदना और समसामयिक मुद्दों को उजागर किया।
साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में उपस्थित श्रोताओं की उत्साही भागीदारी ने इस आयोजन को और भी गरिमामय बना दिया। युवा कवियों की कलम से निकली रचनाएं सुनकर श्रोताओं ने उनकी उत्कृष्टता की सराहना की। इस कविता गोष्ठी ने एक ऐसा मंच प्रस्तुत किया जहाँ युवा प्रतिभाएँ अपने विचार और भावनाएँ व्यक्त कर सकें।
युवाओं का जोश और प्रेरणा
इस गोष्ठी के दौरान, कई कवियों ने आत्मकथात्मक रचनाएँ प्रस्तुत कीं, जिन्होंने उपस्थित दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया। युवा कवयित्रियों ने अपने शब्दों के माध्यम से नारी सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक मुद्दों का संवेदनशील रूप से उल्लेख किया। यह आयोजन मात्र एक काव्य गोष्ठी नहीं था, बल्कि यह समाज के लिए जागरूकता फैलाने का भी एक प्रयास था।
कला और साहित्य की महत्ता
“दस्तक” काव्य गोष्ठी ने यह संदेश दिया कि लेखन केवल एक कला नहीं, बल्कि यह एक जिम्मेदारी है। युवा रचनाकारों की आवाज़ ने यह साबित किया कि साहित्य में यदि जुनून और प्रतिबद्धता हो, तो वह समाज को प्रभावित कर सकता है। उनकी रचनाएँ उन विचारों को उजागर करती हैं जो वर्तमान परिवेश में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
संस्कृति के संरक्षण का संदेश
इस गोष्ठी में प्रस्तुत रचनाओं के माध्यम से एक स्पष्ट संदेश भी गया कि हमारी संस्कृति और धरोहर को सहेजना कितना आवश्यक है। युवा कवियों ने अपनी कविताओं के जरिए इस बात की जानकारी दी कि कैसे हम अपनी परंपराओं को बचाकर रख सकते हैं जबकि आधुनिकता की ओर बढ़ते हैं।
साहित्य के प्रति जागरूकता
दस्तक काव्य गोष्ठी ने साहित्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने का काम किया। ऐसे आयोजनों से युवा रचनाकार प्रोत्साहित होते हैं और उनके मन में साहित्य के प्रति प्यार बढ़ता है। यह न केवल उनकी कला को निखारता है, बल्कि साहित्य के प्रति नए पाठकों और श्रोताओं का भी ध्यान खींचता है।
इस तरह की गोष्ठियाँ साहित्यिक संवाद को जीवित रखने का काम करती हैं। हरिद्वार में “दस्तक” एक अनूठी कड़ी है जो युवा साहित्यकारों की आवाज़ को मजबूती से प्रस्तुत करती है।
अंत में, यह कहना उचित होगा कि साहित्य की इस यात्रा में, युवा कवियों और कवयित्रियों के योगदान को किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके शब्दों में एक ऐसी शक्ति है जो समाज को नई दिशा दे सकती है।
यदि आप और अधिक जानकारी चाहते हैं, तो आप हमारे वेबसाइट पर जा सकते हैं: Discovery Of The India.
संकोच न करें! साहित्य के इस नए युग का हिस्सा बनें और युवा लेखकों का समर्थन करें।
— स्नेहा शर्मा, टीम Discovery Of India
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